नशा एक ऐसी लत है जो व्यक्ति को लगती तो चोरी छिपे है पर अपनी जड़ें जमा लेने के बाद उसी व्यक्ति को सभ्य समाज मे भर्तस्ना का पात्र बना देती है।नशे का लती व्यक्ति इतना असहाय हो जाता है कि सबकुछ जानते हुए भी इसको नही छोड़ पाता।आज के समय में यह बुराई युवाओं में बहुत तेजी से फैल रही है इसके अलावा बच्चों में भी यह अपनी जड़ें जमा रही है।
नशाखोरी की ओर अग्रसर होने के कारण -
⚓आज आधुनिक होने की दौड़ में कुछ बिना किसी की परवाह किए बिना बस भागे चले जा रहे हैं ,उन्हें अपने "अपनो" यहाँ तक कि अपने बच्चों तक को देखने का समय नहीं है लिहाजा बच्चे एकाकीपन से ॻसित होकर नशाखोरी की चपेट मे आ रहें हैं।
⚓नशाखोरी को फैलाने में फिल्मों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई है ।आज कल के बच्चों के रोल माडल फिल्मी हीरो ही होते हैं......और जब रोल माडल ही कहेगा कि "चार बोतल वोदका,काम मेरा रोज का.........."तो बच्चे कैसे वोदका से अछूते रहेगें।
⚓ कमजोर कानून व्यवस्था से नशीले पदार्थ बड़ी सरलता से सभी की पहुच में हैं।कानूनी रूप से रोक होने के बावजूद भी स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तम्बाकू गुटकों की दुकान सबसे अधिक खुली हुई हैं।
⚓ सरकार की उदासीनता भी नशाखोरी को फैलाने का एक प्रमुख कारण है ।नशीले पदार्थों के रैपरो पर अत्याधिक छोटे फांटस् मे एक चेतावनी लिखने व चित्र छापने के अलावा और कोई भी जिम्मेदारी उसकी नहीं है।
⚓ बच्चों मे नशाखोरी की प्रवृत्ति सबसे अधिक अपने घर से ही पनपती है।'डैड' तक तो ठीक था पर अब तो 'माम 'भी धुएँ के छल्ले बनाती हैं तो बच्चे तो बच्चे होते हैं।
बच्चों में नशीले पदार्थ सेवन के लक्षण-
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चों का शरीर कमजोर,आँखें लाल और त्वचा कांति विहीन हो जाती है।
🚬ऐसे बच्चे एकाकीपन का शिकार हो जाते हैं।उन्हें एकांत में रहना अच्छा लगने लगता है।
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चे चिड़चिड़े और हिंसात्मक प्रवृत्ति धारण कर लेते हैं ।
🚬 ऐसे बच्चे अपने शरीर के प्रति उदासीन हो जाते हैं ।शरीर की साफ सफाई से इन की अरुचि हो जाती है।
🚬 ऐसे बच्चों में एकाएक आत्मविश्वास ,यादाश्त और एकाॻता की क्षमता क्षीण हो जाती है।
🚬 बच्चों में चोरी करने ,झूठ बोलने की आदत पनपने लगती है।
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चों के भोजन के तौर तरीकों में बदलाव, खासकर भूख ना लगना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
क्या कदम हो हमारा यदि बच्चा नशे की चपेट में आ गया है?-
🔰इस परिप्रेक्ष्य में सर्वप्रथम यह महत्वपूर्ण है कि यदि हममें को ई व्यसन है तो पहले उसका त्याग करना चाहिए।
🔰बच्चे से संवाद स्थापित करके प्यार से उसे नशीले पदार्थ सेवन से उत्पन्न होने वाली हानियों के बारे में जानकारी देना चाहिए।
🔰 बच्चे के दिमाग को तरोताजा ककरने के लिये कहीं अच्छी मनोरंजक स्थान की यात्रा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
🔰बच्चे को आत्मीयता से आत्मसंकल्पित करने की भावना का विकास करना चाहिए।
🔰बच्चे को एकांत में बिल्कुल भी नहीं रहने देना चाहिए।
🔰 बच्चे के मस्तिष्क को सृजनात्मक कार्य करने के प्रति मोड़ने का प्रयास करना चाहिये।
🔰उसके मस्तिष्क में नशे की संकल्पना को स्वयं के नाश के रुप में स्थापित करना चाहिए।
रजनीश द्विवेदी,प्र०अ०
नशाखोरी की ओर अग्रसर होने के कारण -
⚓आज आधुनिक होने की दौड़ में कुछ बिना किसी की परवाह किए बिना बस भागे चले जा रहे हैं ,उन्हें अपने "अपनो" यहाँ तक कि अपने बच्चों तक को देखने का समय नहीं है लिहाजा बच्चे एकाकीपन से ॻसित होकर नशाखोरी की चपेट मे आ रहें हैं।
⚓नशाखोरी को फैलाने में फिल्मों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई है ।आज कल के बच्चों के रोल माडल फिल्मी हीरो ही होते हैं......और जब रोल माडल ही कहेगा कि "चार बोतल वोदका,काम मेरा रोज का.........."तो बच्चे कैसे वोदका से अछूते रहेगें।
⚓ कमजोर कानून व्यवस्था से नशीले पदार्थ बड़ी सरलता से सभी की पहुच में हैं।कानूनी रूप से रोक होने के बावजूद भी स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तम्बाकू गुटकों की दुकान सबसे अधिक खुली हुई हैं।
⚓ सरकार की उदासीनता भी नशाखोरी को फैलाने का एक प्रमुख कारण है ।नशीले पदार्थों के रैपरो पर अत्याधिक छोटे फांटस् मे एक चेतावनी लिखने व चित्र छापने के अलावा और कोई भी जिम्मेदारी उसकी नहीं है।
⚓ बच्चों मे नशाखोरी की प्रवृत्ति सबसे अधिक अपने घर से ही पनपती है।'डैड' तक तो ठीक था पर अब तो 'माम 'भी धुएँ के छल्ले बनाती हैं तो बच्चे तो बच्चे होते हैं।
बच्चों में नशीले पदार्थ सेवन के लक्षण-
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चों का शरीर कमजोर,आँखें लाल और त्वचा कांति विहीन हो जाती है।
🚬ऐसे बच्चे एकाकीपन का शिकार हो जाते हैं।उन्हें एकांत में रहना अच्छा लगने लगता है।
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चे चिड़चिड़े और हिंसात्मक प्रवृत्ति धारण कर लेते हैं ।
🚬 ऐसे बच्चे अपने शरीर के प्रति उदासीन हो जाते हैं ।शरीर की साफ सफाई से इन की अरुचि हो जाती है।
🚬 ऐसे बच्चों में एकाएक आत्मविश्वास ,यादाश्त और एकाॻता की क्षमता क्षीण हो जाती है।
🚬 बच्चों में चोरी करने ,झूठ बोलने की आदत पनपने लगती है।
🚬 नशीले पदार्थ सेवन करने वाले बच्चों के भोजन के तौर तरीकों में बदलाव, खासकर भूख ना लगना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
क्या कदम हो हमारा यदि बच्चा नशे की चपेट में आ गया है?-
🔰इस परिप्रेक्ष्य में सर्वप्रथम यह महत्वपूर्ण है कि यदि हममें को ई व्यसन है तो पहले उसका त्याग करना चाहिए।
🔰बच्चे से संवाद स्थापित करके प्यार से उसे नशीले पदार्थ सेवन से उत्पन्न होने वाली हानियों के बारे में जानकारी देना चाहिए।
🔰 बच्चे के दिमाग को तरोताजा ककरने के लिये कहीं अच्छी मनोरंजक स्थान की यात्रा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
🔰बच्चे को आत्मीयता से आत्मसंकल्पित करने की भावना का विकास करना चाहिए।
🔰बच्चे को एकांत में बिल्कुल भी नहीं रहने देना चाहिए।
🔰 बच्चे के मस्तिष्क को सृजनात्मक कार्य करने के प्रति मोड़ने का प्रयास करना चाहिये।
🔰उसके मस्तिष्क में नशे की संकल्पना को स्वयं के नाश के रुप में स्थापित करना चाहिए।
रजनीश द्विवेदी,प्र०अ०
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