By- Rajnish Dwivedi
शिक्षा एक ऐसा विषय है जो देश की दिशा और दशा दोनों का भविष्य निर्माण करता है।इसलिए शिक्षा का क्षेत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।संचार प्रौद्योगिकी से देश के शिक्षा क्षेत्र में संचार क्रांति का आगमन पहले ही हो चुका है तथा देश आज इस क्षेत्र में संचारप्रौद्योगिकी का उपयोग करने मे सफल राष्ट्र बन चुका है । संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विद्युत शिक्षकों को 24 घण्टों के लिये एक ऐसे मंच से जोड़ा जा सकता है जहाँ से बिना किसी सीमाकंन के किसी भी क्षण अपने विचारों को प्रसारित किया जा सकता है।इसका यह प्रभाव पड़ा कि जो व्यक्ति समय अभाव अथवा अन्य किसी कारण वश अपने विचारों का प्रकटीकरण नहीं कर सकता था वह तुरंत बिना कहीं आये जाये अपने विचारों को और अधिक सुव्यवस्थित एवं ओजस्वी ढंग से प्रसारण कर पायेगा।
☀ शिक्षा से जुड़े विषयों पर समूह चर्चा द्वारा विषय के उच्चतम सार बिन्दु पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।समूह से जुड़े कुशल शिक्षक और प्रशिक्षक जब एक ही मंच पर एक ही विषय पर मंथन करते हैं तो विषय का सार अपने उच्चतम् स्तर को प्राप्त कर लेता है ऐसा स्वाभाविक ही है।किसी भी विषय पर उच्चस्तरीय चर्चा हेतु समूह मे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का जो उपयोग किया है वह प्रशंसनीय व अनुकरणीय है।
☀शिक्षा जगत के अलावा अन्य विभिन्न क्षेत्रों व अलग अलग शिक्षण विधियों को एक दूसरे से परिचय करने का कार्य भी समूह द्वारा किया गया है।समूह के सदस्य अलग अलग शिक्षण विधियों पर चर्चा करते है तो स्वत: ही इन विधियों से परिचय प्राप्त हो जाता है।
☀किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान एक आभासी कक्षा कक्ष जैसा वातावरण निर्मित हो जाता है।बिना प्रशिक्षण कक्ष में जाये कुशल व योग्य प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होने का अवसर इस समूह ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से प्रदान किया है। बिना किसी समय व्यर्थ,व निवेश किये मात्र संचार माध्यम से शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिये समूह ने नए आयामों का निर्माण किया है।
🌑 समूह मे सम्मिलित शिक्षकों द्वारा चर्चा ककी गयी शिक्षण विधियों को विद्यालय में प्रयोग करने पर सकारात्मक परिणाम परिलक्षित हुए हैं।
🌑समूह मे प्रसारित विभिन्न गतिविधियों व शिक्षण अधिगम सामग्रियों से परिचय प्राप्त हुआ।इन गतिविधियों और शिक्षण अधिगम सामग्रियों का उपयोग विद्यालय में कर शिक्षण प्रक्रिया को रुचिकर व सरल प्रभावी बनाया जा सका है।
🌑क्षेत्रीय भाषा की कठिनाइयों से भी निजात मिल गयी क्योंकि समूह में क्षेत्रीय भाषा संबंधी चर्चा आदि होती रही है।
🌑बेसिक शिक्षा में नवाचारों की विशेष आवश्यकता है।समूह से सीखे हुए नवाचारों को विद्यालय में प्रयोग करने से विद्यालय के शैक्षिक स्तर में सुधार भी परिलक्षित है।
🌑संकेतक की संकल्पना व संकेतकों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से विद्यालयी स्तर पर इसे बड़ी सरलता से लागू किया जा सका है।आज विद्यालय में संकेतकों द्वारा बालक की सीखने की दिशा तय करके सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन किया जा रहा है।
🌑प्रायः ऐसा होता है कि किसी भी विषय पर चर्चा करते समय नकारात्मक तथ्यों का समावेश हो जाता है और कुछ देर के लिये नकारात्मक पक्ष सबल हो जाता है जिससे कार्य करने की क्षमता व उत्सुकुता समाप्त होने लगती है परन्तु समूह में किसी भी चर्चा में नकारात्मक पक्ष सबल नहीं हो पाता है और यदि कुछ नकारात्मक तथ्य उभरते भी हैं तो उनका त्वरित उपाय भी हो जाता है जिससे कार्य करने की क्षमता और अधिक सबल व कुशल हो जाती है।इसी कुशल वसबल कार्य क्षमता का उपयोग कर विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार गतिमान हुए हैं।
🌑समूह द्वारा अर्जित ज्ञान को विद्यालय स्तर पर प्रयोग करने से विद्यालय की छवि के जो नकारात्मक पक्ष थे वे धीरे धीरे समापन की ओर है।समूह द्वारा अर्जित ज्ञान से शिक्षण कला को सृजनशील बनाने में बहुत अधिक सहायता प्राप्त हुई है।
🌑 बालक की मनोदशा से कैसे परिचित हुआ जाये यह ज्ञान समूह से अर्जित ज्ञान द्वारा ही संभव हो सका है।विभिन्न शिक्षण विधाओं द्वारा बालक के अन्दर सीखने के प्रति लगाव व उत्सुकता बढ़ रही है।
अन्ततः सार यह निकलकर आ रहा है कि शिक्षा में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में यह समूह उच्चस्तरीय श्रेणी प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।समूह द्वारा अर्जित ज्ञान के प्रयोग से विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता सम्वर्धित व पल्लवित हो रही है।समूह शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सार्थक भूमिका को मजबूती के साथ स्थापित कर चुका है तथा और अधिक प्रभावी नवीन अन्वेषणों की तरफ अग्रसर है।
शिक्षा एक ऐसा विषय है जो देश की दिशा और दशा दोनों का भविष्य निर्माण करता है।इसलिए शिक्षा का क्षेत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।संचार प्रौद्योगिकी से देश के शिक्षा क्षेत्र में संचार क्रांति का आगमन पहले ही हो चुका है तथा देश आज इस क्षेत्र में संचारप्रौद्योगिकी का उपयोग करने मे सफल राष्ट्र बन चुका है । संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विद्युत शिक्षकों को 24 घण्टों के लिये एक ऐसे मंच से जोड़ा जा सकता है जहाँ से बिना किसी सीमाकंन के किसी भी क्षण अपने विचारों को प्रसारित किया जा सकता है।इसका यह प्रभाव पड़ा कि जो व्यक्ति समय अभाव अथवा अन्य किसी कारण वश अपने विचारों का प्रकटीकरण नहीं कर सकता था वह तुरंत बिना कहीं आये जाये अपने विचारों को और अधिक सुव्यवस्थित एवं ओजस्वी ढंग से प्रसारण कर पायेगा।
☀ शिक्षा से जुड़े विषयों पर समूह चर्चा द्वारा विषय के उच्चतम सार बिन्दु पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।समूह से जुड़े कुशल शिक्षक और प्रशिक्षक जब एक ही मंच पर एक ही विषय पर मंथन करते हैं तो विषय का सार अपने उच्चतम् स्तर को प्राप्त कर लेता है ऐसा स्वाभाविक ही है।किसी भी विषय पर उच्चस्तरीय चर्चा हेतु समूह मे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का जो उपयोग किया है वह प्रशंसनीय व अनुकरणीय है।
☀शिक्षा जगत के अलावा अन्य विभिन्न क्षेत्रों व अलग अलग शिक्षण विधियों को एक दूसरे से परिचय करने का कार्य भी समूह द्वारा किया गया है।समूह के सदस्य अलग अलग शिक्षण विधियों पर चर्चा करते है तो स्वत: ही इन विधियों से परिचय प्राप्त हो जाता है।
☀किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान एक आभासी कक्षा कक्ष जैसा वातावरण निर्मित हो जाता है।बिना प्रशिक्षण कक्ष में जाये कुशल व योग्य प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होने का अवसर इस समूह ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से प्रदान किया है। बिना किसी समय व्यर्थ,व निवेश किये मात्र संचार माध्यम से शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिये समूह ने नए आयामों का निर्माण किया है।
संचार प्रौद्योगिकी से अर्जित ज्ञान का विद्यालय स्तर पर अनुप्रयोग के दौरान निकले परिणाम :
🌑 समूह मे सम्मिलित शिक्षकों द्वारा चर्चा ककी गयी शिक्षण विधियों को विद्यालय में प्रयोग करने पर सकारात्मक परिणाम परिलक्षित हुए हैं।
🌑समूह मे प्रसारित विभिन्न गतिविधियों व शिक्षण अधिगम सामग्रियों से परिचय प्राप्त हुआ।इन गतिविधियों और शिक्षण अधिगम सामग्रियों का उपयोग विद्यालय में कर शिक्षण प्रक्रिया को रुचिकर व सरल प्रभावी बनाया जा सका है।
🌑क्षेत्रीय भाषा की कठिनाइयों से भी निजात मिल गयी क्योंकि समूह में क्षेत्रीय भाषा संबंधी चर्चा आदि होती रही है।
🌑बेसिक शिक्षा में नवाचारों की विशेष आवश्यकता है।समूह से सीखे हुए नवाचारों को विद्यालय में प्रयोग करने से विद्यालय के शैक्षिक स्तर में सुधार भी परिलक्षित है।
🌑संकेतक की संकल्पना व संकेतकों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से विद्यालयी स्तर पर इसे बड़ी सरलता से लागू किया जा सका है।आज विद्यालय में संकेतकों द्वारा बालक की सीखने की दिशा तय करके सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन किया जा रहा है।
🌑प्रायः ऐसा होता है कि किसी भी विषय पर चर्चा करते समय नकारात्मक तथ्यों का समावेश हो जाता है और कुछ देर के लिये नकारात्मक पक्ष सबल हो जाता है जिससे कार्य करने की क्षमता व उत्सुकुता समाप्त होने लगती है परन्तु समूह में किसी भी चर्चा में नकारात्मक पक्ष सबल नहीं हो पाता है और यदि कुछ नकारात्मक तथ्य उभरते भी हैं तो उनका त्वरित उपाय भी हो जाता है जिससे कार्य करने की क्षमता और अधिक सबल व कुशल हो जाती है।इसी कुशल वसबल कार्य क्षमता का उपयोग कर विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार गतिमान हुए हैं।
🌑समूह द्वारा अर्जित ज्ञान को विद्यालय स्तर पर प्रयोग करने से विद्यालय की छवि के जो नकारात्मक पक्ष थे वे धीरे धीरे समापन की ओर है।समूह द्वारा अर्जित ज्ञान से शिक्षण कला को सृजनशील बनाने में बहुत अधिक सहायता प्राप्त हुई है।
🌑 बालक की मनोदशा से कैसे परिचित हुआ जाये यह ज्ञान समूह से अर्जित ज्ञान द्वारा ही संभव हो सका है।विभिन्न शिक्षण विधाओं द्वारा बालक के अन्दर सीखने के प्रति लगाव व उत्सुकता बढ़ रही है।
अन्ततः सार यह निकलकर आ रहा है कि शिक्षा में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में यह समूह उच्चस्तरीय श्रेणी प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।समूह द्वारा अर्जित ज्ञान के प्रयोग से विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता सम्वर्धित व पल्लवित हो रही है।समूह शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सार्थक भूमिका को मजबूती के साथ स्थापित कर चुका है तथा और अधिक प्रभावी नवीन अन्वेषणों की तरफ अग्रसर है।

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